• pragti 25w

    सड़क

    कभी कभी सड़क पर एक साथ कई दृश्य नज़र आते है,कभी कुछ नन्हे बच्चे खिलौने खरीदते तो कुछ नन्हे हाथ खिलौने बेचते नजर आते है/कुछ नन्हे कंधे किताबे ले स्कूल की तरफ जा रहे होते है तो कुछ बच्चे उम्र से पहले बड़े हो कमा रहे होते है/सभी सड़क पे पथिक बने होते है, तो कही बचपन,जवानी,बुढापा साथ चल रहे होते है/कभी कोई बुजुर्ग बच्चो के साथ टहल रहे होते है तो कभी कुछ बुजुर्ग अकेले खड़े हो अपने लिए दया भावना की अपेक्षा लिए भोजन की ववैस्ता कर रहे होते है,कभी कोई मालिक अपनी बड़ी गाड़ियों से जा रहे होते है ,और कभी कोई रिक्शा चला अपनी जीविका चला रहे होते है/ ,कभी कुछ ऊंचे घर के जोड़े अपनी गाड़ियों में लड़ रहे होते है तो कही कुछ जोड़े दिन भर की कमाई लिए मुस्कुराते हुए बच्चे को कंधे पे बिठाए पैदल चल रहे होते है / कभी कोई कही पहुंचने की जल्दबाजी में होता है तो कभी कोई सुकून से किनारे खड़े होके इंतजार कर रहा होता है/रात सड़क कुछ सुनसान होती है ,लोग अपने आशियाने की ओर , आने वाले कल के सपने लिए बढ़ रहे होते है तो कुछ सड़क पे किनारे बस किसी तरह रात बिताने की ववैस्ता कर रहे होते है/सड़क सिर्फ सड़क नही होती बल्कि बहुत सी जिंदगियों का आइना होती है ,निर्भर देखने वालो पे करता है की वो कभी किनारे खड़े हो ये सब देखते भी है या सड़क उनके लिए कही पहुंचने का सिर्फ जरिया बन रह जाती है/