• mamtapoet 7w

    #rachanaprati119
    @goldenwrites_jakir, @anusugandh, @anandbarun


    सब कहे मुझे तेरी परछाई
    पर भाई में मुझे तू नज़र आई
    आईना क्यों झूठ बोले
    तेरी छवि तो मैंने उसमें पाई।

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    परछाई

    बचपन से सुनती आई हूँ
    लड़की जो पिता को गई
    बड़ी भाग्यवान वो कहलाई।
    लड़के ने यदि माँ से संस्कारो की विरासत पायी
    तो वो क्यों न कहलाया मां की परछाई।

    छोटी सी थी तब मम्मी मुझे छोड़कर भगवान के पास चली गई, क्योंकि उनको भी मेरी मम्मी जैसी मम्मी चाहिए थी, यही तो कहा था भैया ने। बस तब से ही भैया मेरी मम्मी बन गये , बिल्कुल मम्मी की परछाई जैसे हर दम मेरे साथ, प्रत्यक्ष और अपनी सीख और बातों से अप्रत्यक्ष रूप में। मेरी चोटी बनाने से लेकर, H. W. कराने और हाँ किस से कैसे बात करनी है, और कब चुप रहना है, सब कुछ तो मुझे भैया ने ही सिखाया।
    जब जब मम्मी की जरूरत थी वहाँ भैया मेरे साथ थे। और आज भी, जब पहली बार शादी के बाद पीयूष के साथ अपने घर में आई। पूजा की थाल हाथ में लिए माँ ने ( भैया)मेरी नज़र उतारी तो आँसू आ रहे थे उनकी आँखों में, मुझसे पूछा तू खुश तो है न, अपने नये संसार में, कभी कोई भी तकलीफ़ हो हिचकिचाना नहीं और सीधा मुझे आकर बताना, सबकी खबर ले लूँगा। ये कहते हुए उनकी आँखों में आँसू बहने लगे और उनकी आँखों में मुझे नज़र आई माँ की परछाई।