• dishadinesh 106w

    रोज़ ना जाने कितने ही लोग जान गंवाते है, हम प्रश्न करते है, सरकार से जवाब मांगते है।
    पर जब इक जवान जान गंवाता है, ना जाने क्यूं हमें ये उसका फ़र्ज़ लगने लगता है!
    हमे समझना चाहिए हमारी ९-८ वाली नौकरियों की तरह वो भी अपना काम ही कर रहे है,अपना और अपने परिवार वालों का पेट पालने के लिए।
    बस वो हमसे सोच में और सम्मान में बोहोत ज़्यादा कामयाब है, जो इस राह को चुना।

    कृपया करके, हमे युद्ध चाहिए और मार गिराओ सबको के नारे से पूर्व इक दफा उनके बारे में अवश्य सोचें।
    युद्ध कभी किसी मसले का हल नहीं होता।

    दूसरा हमारी सरकार को उसकी गालवान नीति और वहां हो रहे मुठभेड़ का जनता को सामने खुल कर रखना चाहिए, ये जानना जनता का सर्वोपरि अधिकार है।

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    उस मिट्टी की खुशबू में कोई बात तो होगी,
    जहां अपने आसमां को बचाने के लिए जवानों ने अपना आखिरी खत अधूरा छोड़ दिया।
    ©dishadinesh