• _truewords 32w

    शिकायतों का सैलाब है भर चुका दिल में,
    नफरत की जंग लड़ रही अंदर,
    गुस्से से भरी वो जूठी मुस्काहट,
    अजीब आवाज आ रही है अंदर से, पर उसकी चीख नही,
    अजीब नदियां बह रही अंदर
    जिनका कोई ठिकाना नही,
    शायद! ये लड़ाई खुद से है मेरी।
    जिसमे सिर्फ हार ही है।
    _kk