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    पानी से मोती❤

    जब मेरे अंदर से आवाज़ आयी अकेले बैठकर,
    तब मैं सुलझाने लगी ज़िंदगी के झमेले बैठकर।

    कर सकती हूँ बहुत कुछ पर कर नहीं पाती हूँं,
    वज़ह यही है शायद कि मैं स्त्री जाति हूँ।

    जब करने लगूँगी तो बस कुछ कर ही जाऊँगी मैं,
    कोशिश यही रहेगी मेरी,
    सबकी परेशानियाँ दूर भगाऊंगी मैं।

    मैं चाहती हूँ मेरी जिंदगी में बहुत बेहतरीन लोग आएं,
    जब खुद न कर पाऊँ मैं खुदपर,
    तब वो मुझ पर विश्वास कर जाएं।

    ऐसी बनूं मैं न मेरे बारे किसी के मुख पर निंदा रहे,
    मैं मिट जाऊं पूरी तरह बेशक,पर मेरा वज़ूद जिंदा रहे।

    यहाँ दुःख दर्द की आग सभी लोग सेकते हैं,
    रुकावटें कोई नहीं देखता ज़माने में,
    यहाँ सब परिणाम देखते हैं।

    निष्ठा बनी रहे मेरी प्रभु में,मैं न किसी से अंजान रहूँ,
    मन की मैल मिट जाए बस,मैं न ज़रा भी बेईमान रहूँ।

    सहारा बनूं मैं सबका, अँधों के लिए मैं ज्योति बनूं,
    ऐसी शख्सियत बनाना प्रभु,मैं पानी से मोती बनूं।

    ©ईशु शर्मा