• happy81 7w

    चलो आज लिखते है...
    कई दिनों से दुँधला दुँधला लग रहा है दिल
    इस पर कुछ बेहिसाब लिखते है..
    चलो आज लिखते है..
    आज़मा कर देखा महलों का सुख हम फ़क़ीर हर जगह पीर का जवाब लिखते है..
    हमें गुरूर है अपने हुज़रे का हम वक़्त को मंदिर का प्रसाद लिखते है..
    चलो आज लिखते है..
    नींद आती नहीं थी और सो जाया करती भी थी मैं..
    दिल में भर कर खो जाया करती थी मैं
    ये कैसे कागज़ी दिमाग रखते है
    हमें याद नहीं कल का हिसाब ये सब याद रखते है..
    चलो आज लिखते है..
    मज़्जिद में भी लोग नापते है चादर की कीमत..
    महंगी वाली ज्यादा पास रखते है..
    किस्से कितने दुःखदायी है जग के..
    भगवान भी पैसो की मुराद रखते है..
    चलो आज लिखते है..
    निकल पड़ती है जुबाँ खुद को समझाने अंदर तक.
    ऊपर कुछ अंदर कुछ रकीब ऐसे किरदार रखते है..
    छुपाती है माँ घऱ की दिक्कत कंधों पर बच्चों को बाप रखते है..
    ताजमहल की रौनक कम हम दो सितारों से सरफ़राज़ रखते है..
    चलो आज लिखते है..

    ©happy81