• somil_gupta_31 101w

    माँ

    खुद रोते हुए भी हमें हंसाती थी,
    वैसे हंसाना किसी को कहाँ आता माँ,
    खुद जागकर हमें चैन से सुलाती थी,
    वैसे सुलाना किसी को कहाँ आता माँ,
    अपने हिस्से का निवाला भी हमें खिलाती थी,
    वैसे खिलाना किसी को कहाँ आता माँ,
    जी करता है आज गले लग कर रो लू माँ,
    आज फिर एक बार बच्चे की तरह तेरी गोद मे सो लू माँ ।।

    ©somil_gupta_31