• hindinama 36w

    @happy81( हर्षिता) जी की रचनाएं पढ़ें

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    समाज की छवि को दर्शाती एक रचना) :
    बहुत अच्छा लिखा है) :

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    अनचाही बिटिया

    माँ खोज रही थी सिरहाने,, जिस लाडले को,,
    अपने परिवार के चराग अपने वंशज को,,
    उसी दौरान गूंज उठी कुन कुन कर बिटिया,,,
    आह....... अनचाही बिटिया......
    तैयारी चल रही थी 26 जनवरी को भारत के आने की...
    उस दिन गोद में आगयी भारती बिटिया...
    आह अनचाही बिटिया.....
    गुड्डे ,,खिलौने सब मुन्ने के हिसाब के,,
    आगये थे कपड़े सब मुन्ने के नाप के,,
    बेटी के बाद अब तो ना आएगी दोबारा बिटिया...
    यहीं सोच कर जन्मी तो ना थी मासूम बिटिया...
    परिवार,, घऱ मोहोल्ले में खबर जा चुकी थी,,
    सब सांत्वना से ख़ुशी को ओढ़े थे,,
    अनचाही बिटिया यूँ धरती पर आ चुकी थी,,
    आधी बेहोशी में थी मेरी माँ,,
    विलाप करने लगी,,
    बेटी दे कर बेटा बदल लू कुछ ऐसा विचार करने लगी,,
    डर गयी सांस के मातम से,, योजना बेहिसाब करने लगी,,
    तभी डॉ ने जय माँ भारती की जय जय कार करी,,
    समझाया रुदन की पीणा को,,
    माँ ने अनचाही बेटी स्वीकार करी !!!....
    डर ,,डर कर बढ़ती गयी बेटी आज घऱ का गौरव है,,
    मेरी छोटी ही बहन है मेरे लिए वो मेरा गौरव है !!!..
    सादगी,, समझदारी,, करुणा की कोई मूरत है,,
    प्यारी,, छोटी,, लक्ष्मी वीरांगना जैसी सूरत है..
    लिखते लिखते आँखों में पानी आ गया...,,
    कहानी कुछ और लिखनी थी मैं ठहरा निक्कमा शायर..
    कहाँ से कहाँ आ गया...
    सोच समझ कर मैं लिखता कहां था,,
    जो दिल पर निकला.. वहीं कागज़ पर आ गया !!..

    ©happy81