• abhishek141 130w

    साहिल पर डुबा सूरज कुछ तो कहता होगा
    ए नरगिस तमन्ना उसको भी होगी
    पर ना जाने वो क्यों चुप रहता होगा
    शायद किसी के दीदार से कभी उसे भी सुकून आता होगा
    कल मिलनै कि उम्मीद में जिससे वो साहिल पार जाता होगा
    पर फिर शायद किसी रोज जब वो वापस आएगा
    और अपनी महबूबा को किसी हरीफ की बाहों में पाएगा।
    तो ताबीर मोहब्बत की दिखाने को वो तिल-तिल कर जलेगा
    और उसकी मोहब्बत से महरूम हर कोई इसे गर्मी ही समझेगा
    हाँ पर इस सब के बावजूद वो फिर जब किसी रहनुमा से राबता होगा
    अब उस रहनुमा को ही दिल-ए-रहजान वो समझेगा
    और इस तरह अब सच्चा प्यार शायद उसे बदल देगा
    पर लोग तो पागल हैं उसकी एकतरफा मोहब्बत को ठंडीयां कहकर टाल देंगे
    नवम्बर आ गया है कहकर एक आद कम्बल और निकाल लेंगे
    और इस सब के बीच उसकी मोहब्बत फिर खता कर जाएगी
    साल बदलेगा और वो किसी और को दिल दे जाएगी
    फिर एक रोज वही सब फिर से होगा
    साहिल पर डुबा सूरज कुछ तो कहता होगा
    ए नरगिस तमन्ना उसको भी होगी इश्क की
    तभी तो धरती पर मौसम बदलता होगा।
    ©abhishek