• ayush_tanharaahi 175w

    प्रश्न -

    भगवान ब्रह्मा के 5 शीश थे, शिव के उग्र रूप और रुद्र अवतार काल भैरव ने ब्रह्मा जी का एक शीश, अपने नाखून से काट दिया था। जिसके बाद उन्ह्र ब्रह्म हत्या का दोष लगा था। वो कौन मनुष्य था जिसने काल भैरव को ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति दिलाई थी?

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    उत्तर

    ब्रह्मा के 5 शीश थे । जिनमे से चार ,चार वेदो की वाणी हैं। ब्रह्मा का पांचवा शीश, अहंकार और दंभ का प्रतिक बन चुका था। जिसका अन्त शिव के रुद्र रूप काल भैरव ने किया। मान्यता हैं, की काल भैरव का जन्म शिव के रक्त कण से हुआ हैं, जो दो रूपों मे हैं। जिनका बाल रूप बटुक भैरव और युवा रूप काल भैरव हैं। काल भैरव अग्नि तत्व के देवता होने के साथ साथ, सनातन मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के भी स्वामी हैं।
    जब ब्रह्मा का चौथा शीश अहंकार वश, महादेव की अवहेलना कर उन्हे अपशब्द कहने लगा तो, महादेव ने क्रोधित हो, काल भैरव की उत्त्पत्ति कर उन्हें उस शीश का अन्त करने का आदेश दिया।
    महादेव की बात मानकर काल भैरव ने अपने नख मात्र से ब्रह्मा का पांचवा शीश उनके धड़ व बाकी चारो शीशो से अलग कर दिया।
    जिसके बाद महादेव के आदेश अनुसार वे ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्त होने के लिये, काशी के समीप गंगा तट पर, विराजमान हो गये, और काशी का कोतवाल कहलाने लगे।


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    प्रश्न 4-उत्तर

    लगभग हजारों वर्षो तक वह अवंतिका की पावन भूमि पर एक कठोर चट्टान के रूप मे वहीं तपस्या मे लीन थे। उस समय पृथ्वी पर चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य का शासन चल रहा था। अगहन मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को काल भैरव का अवतार हुआ था। जिसे काल भैरवअष्टमी भी कहाँ जाता हैं। सम्राट विक्रमादित्य उस पावन पर्व को उस समय अपने बंधु-बांधवो के साथ मना रहे थे, मगर कुछ लोगो ने सम्राट को धौखा देते हुएँ काल भैरव के अभिषेक के दुग्ध मे मदिरा मिला दी थी। जिससे काल भैरव रुष्ट हो गये थे। जब सम्राट को यह और उन्होने अपना रुद्र रूप धारण कर अवंतिका की नगरी पर कहर ढ़ा दिया था। जब सम्राट विक्रमादित्य को यह बात पता चली तो उन्होनें, काल भैरव द्वारा ब्रह्मा के कटा शीश ढुँढ निकाला और, उसका विधि-विधान पूर्वक तर्पण कर, काल भैरव को ब्रह्म हत्या दोष से मुक्त कराया। जिससे काल भैरव उन पर प्रसन्न हो गये तथा, सदा अवंतिका मे रह वहां के कोतवाल के रूप मे वही विराजमान हो गये। इस सारे घटनाक्रम मे मदिरा का भी योगदान रहा था, इसलिये काल भैरव ने आशीर्वाद स्वरूप वरदान देते हुएँ कहाँ, जो भी मनुष्य श्रद्दा पूर्वक यहां मदिरा का प्रसाद चड़ायेगा, उसके घोर शत्रुओ का दमन होगा,व उसकी हर वांछित मनोकामना पुर्ण होगी।
    उस समय के बाद से आज तक अवंतिका अर्थात् उज्जैन मे काल भैरव की प्रतिमा लगातार मनुष्यों की बुराई को, उनके पापों को उनके द्वारा चडाई गई मदिरा के रूप मे गृहण करती जा रही हैं।
    यह पुरा विवरण ब्रह्म वैवर्त पुराण मे निहित हैं।
    ॐ काल भैरवाय नमः
    आयुष पंचोली
    ©ayush_tanharaahi