• p_pranali 51w

    फिर एक उम्मीद लगाए बैठा है दिल
    मिलेंगे हम किसी मंजर पर फिर
    जहाँ जज़्बा हो मोहब्बत निभाने का
    और हवाएँ हो प्यार भरे दुआओं की
    संग चलते रहे यूँही हाथ थामे हमेशा
    जिन्हें हौसला मिला हो काबिलियत का
    कर पार रिवाजों का गहरा दरीया
    बसाए अपने सपनों का आशियाना

    - प्रणाली