• saloniiiii 51w

    औरत

    मुझे अफ़सोस है तुम्हारे हालात पर
    हालात जिनसे तुम दूर जाना चाहती हो
    दूर उन लोगों से, उन रिश्तों से
    रिश्ते, जो तुम्हें कभी खुशी ना दे पाऐ

    मुझे अफ़सोस है तुम्हें छोड़ना पड़ा
    छोड़ना पड़ा अपना घर, माँ-बाप
    घर जहाँ शांति थी, सुकून था
    सुकून जो तुम अब ढूंढ़ रही हो

    मुझे अफ़सोस है कि तुम एक बंधन में हो
    बंधन जो कभी टूट नहीं सकता
    टूट नहीं सकता क्यों कि लोग क्या कहेंगे
    लोग, जिन्हें तुम्हारे दुःख का अंदाज़ा भी नहीं

    मुझे अफ़सोस है कि तुम किसी की अमानत हो
    अमानत जिसकी कोई कद्र नहीं
    कद्र करना क्या है, वो जाना ही नहीं
    वो, जो कहने को तुम्हारा है और तुम उसकी

    मुझे अफ़सोस है कि तुम एक औरत हो
    औरत, जो सब कुछ है बेटी, बहू, बहन, माँ, पत्नी
    सब कुछ,पर तुम खुद कुछ नहीं
    तुम्हारा वजूद शून्य है, बस एक शून्य

    ©saloniiiii