• saknim24 19w

    रास्तों में कुछ कशिश ऐसी है
    कि हम मंज़िल भुला बैठे हैं
    सफ़र छोटा नहीं ये मानते हैं मगर
    हम हर मक़ाम को खो बैठे हैं

    जिंदगी भी इतने मोड़ ले आती है
    कि हम ठहरना भुला बैठे हैं
    पता नहीं मिलता अक्सर खुशियों का मगर
    हम ग़म को मुस्कुराहट में बंद कर बैठे हैं

    कई बार नया दिन ऐसे इम्तिहान लेकर आता है
    कि हम हारना - जीतना भुला बैठे हैं
    हर लम्हा यादों का हिस्सा बनता जा रहा है मगर
    हम ख़ुद से आज को जीने का वादा कर बैठे हैं....
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