• devdiwan 29w

    बदनसीब

    ना जाने कहां मेरा नसीब खो गया
    चंद लम्हों में मेरा गुरूर गायब हो गया
    कुछ गिला तो ज़रूर थी खुदा को मुझसे
    जो मैं इतना बदनसीब हो गया

    ना जाने कहां मेरा नसीब खो गया
    चंद लम्हों में मेरा गुरूर गायब हो गया
    जो मोहब्बत चाही थी बचपन से
    बचपन में ही उससे महरूम हो गया

    ना जाने कहां मेरा नसीब खो गया
    चंद लम्हों में मेरा गुरूर गायब हो गया
    ऊंगली पकड़कर चला था जिसकी
    उसी शख़्स से जुदा हो गया

    ना जाने कहां मेरा नसीब खो गया
    चंद लम्हों में मेरा गुरूर गायब हो गया
    इतनी कम उम्र में भारी नुकसान हो गया
    खोकर वालिद को अपने मैं लाचार हो गया

    ना जाने कहां मेरा नसीब खो गया
    चंद लम्हों में मेरा गुरूर गायब हो गया
    सहारा बनने के ख़्वाब देखते - देखते
    मेरे सिर से वालिद का साया खो गया

    ना जाने कहां मेरा नसीब खो गया
    चंद लम्हों में मेरा गुरुर गायब हो गया
    कुछ गिला तो ज़रूर थी खुदा को मुझसे
    जो मैं इतना बदनसीब हो गया


    ©Dev ✍