• namrata_123 88w

    ऊन गहराईओ मे डुब कर देखते है ,
    महंगा सा वक्त खुद को देकर देखते है

    चलोना आसमानो मे ऊडने चलते है ,
    खवाब का क्या कुछ भी कर सकते है ,
    महंगा सा वक्त खुद को देकर देखते है

    अरे वो रोक जो लगा रखी है ,
    वो चाबी ढुंढते है ,
    महंगा सा वक्त खुद को देकर देखते है

    खुद को जानेमन कहकर हसते है ,
    हर वक्त के साथी को कहते है ,
    चलोना मुसाफिर बनके चलते है,
    महंगा सा वक्त खुद को देकर देखते है

    घडी के पैओ पे तो रोज चलते है
    चलो ऊस वक्त को पेगाम दिऐ कहते है ,
    क्युं दोस्त चलना साथ हसते है ,
    महंगा सा वक्त खुद को देकर देखते है
    ©namrata_123