• rhapsodist 46w

    ऐसे ज़िंदा रहने से तो बेहतर है कि मर जाते हैं
    साँसों के बोझ के तले गुज़र जाते हैं

    जिनको देखने से पहले आंखे बंद कर ली थी मैंने
    न जाने वही मंज़र ही क्यों साफ नजर आते हैं

    खैर इतने सबक ज़रूरी तो नही थे जीने को
    फिर भी जिंदा हैं तो कुछ और संवर जाते हैं

    सारे ख्वाब जो अधूरे मर जाते हैं सीने में
    दफनाए नही जाते तो आखिर किधर जाते हैं?

    खुशियाँ टिकती ही नही दो पल मेरे पास
    कम्बख़्त ये दर्द ज़माने भर के लिए ठहर जाते हैं।
    ~r