• rani_shri 31w

    मैं हिंदी,क्या तुम अंग्रेज पिया जी,
    अदा तुम्हारी हैरतअंगेज पिया जी।

    चोरी-चुपके दिल में घर कर बैठे,
    सच हो तुम कितने तेज पिया जी।

    बैराग के मरीज लगते तो नहीं हो,
    फ़िर हमसे क्यों परहेज पिया जी।

    मुझे रंग डाला किस रंग से तुमने,
    क्या तुम हो कोई रंगरेज पिया जी।

    एक बार ही नज़र तो डालो उनपर,
    सजी है जो प्रेम की सेज पिया जी।

    कुछ भी न लिखो उस चिट्ठी में तुम,
    दिल बस अपना दो भेज पिया जी।

    तुम मेरा हाथ मांगने घर आ जाओ,
    मैं बनकर आऊंगी दहेज पिया जी।
    ©rani_shri