• dil_k_ahsaas 7w

    " ख्वाब "

    आँखों की पुतलियों में एक चेहरा ठहर गया है
    जो पलकें झपकाऊँ तो सीधा दिल मेँ उतरता है।

    चाहत जाग रही है धीरे धीरे, तरंगों को ना छेड़ो यूँ
    चाँद दिलबर को लाया है, अब ख्वाब बन आँखो में उतरना है।

    नींद में भी क्यूँ अधरों पर मुस्कान खेलती है
    क्या साजन ने तुम को कस कर अंग लगाया है।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas