• jigna_a 15w

    तुम्हारी तरंगें बदलो,
    तरंग लंबाई बदलेगी,
    दुनिया को छोड़ो,
    खुद को पकड़ो,
    कलम खुदबखुद संभलेगी,
    सही दिशा में चल देगी।

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    बुरा कोई लिखता ही नहीं,
    सब अच्छा लिखते,
    हाँ चलो माना सब अच्छा लिखते,
    पर क्या सच्चा लिखते?
    और जब लिखा सच्चा सच्चा,
    तो क्यों कहते वो ही सब,
    बड़ा ही टुच्चा लिखते,
    बड़ी महंगी होती सुन बबुआ,
    खुद की खुद संग वफ़ादारी,
    वाहवाही की दुनिया में सबकुछ,
    बस भूल चुके हैं ज़िम्मेदारी,
    कौन है वो जो कहते रहते,
    बुद्धु हो तुम जो सहते रहते,
    दाद चाहते हो सभी की,
    क्या कहा???
    अब भी दाद चाहते हो सभी की,
    समझ लो अबतक कच्चा लिखते,
    और जिस दिन रो दो दरिया भर,
    तुमको कुरेदे तुम्हारे ही आखर,
    तब समझना मेरे दिलबर,
    अब जा कहीं तुम,
    हो पक्का लिखते,
    हाँ पक्का लिखते।
    ©jigna_a