• prashant_gazal 23w

    ग़ज़ल ( किताब)

    बहरे मुजतस मुसमन मख़बून महज़ूफ
    मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
    1212 1122 1212 22


    कहीं पे ख़ार , कहीं पे गुलाब होता है l
    यहाँ नसीब के ज़रिए हिसाब होता है l

    सफ़र में दूर करे जो सियाह अंधेरा ,
    चराग़-ए-इल्म वही आफ़ताब होता है l

    अमीर हो तो सुनो ऐब सैकड़ों पालो ,
    ग़रीब का तो हुनर भी ख़राब होता है l

    मुझे सवाल परेशान कर नहीं सकते ,
    अजी! ज़वाब मेरा लाज़वाब होता है l

    मशाल कौन जलाए, किसे थमाए अब ?
    लहूलुहान बड़ा इंक़लाब होता है l

    शराब प्यास बुझा दे , कबाब बिस्मिल्ला,
    तलाश कौन करे क्या सराब होता है?

    जह-ए-नसीब अगर ये समझ सके दुनिया,
    'ग़ज़ल' का शेर मुकम्मल किताब होता है l
    ©prashant_gazal