• shayarana_girl 43w

    यूं ही बैठे बैठे ये खयाल आया कि
    जैसे कला का प्रदर्शन करने वाले को कलाकार कहते,,
    (तो जो दर्शाता है प्रेम को उसे प्रेमकार कह सकते क्या,,
    नहीं नहीं में अपनी बात नहीं कर रही,,)
    मै तो अपने विज्ञान की बात कर रही,,
    जिसका हर एक अंश हमे दिखाता है उसमे व्याप्त
    अथाह शक्तियों के पुंज को,,और शक्ति ही तो प्रेम का आधार है,,
    क्यूंकि अगर प्रेम में शक्ति ना होती,,
    तो क्या कलयुग में जन्मी मीरा का मिलन होपाता
    द्वापर युग में जन्मे श्री कृष्ण से,,
    अगर ऐसा न होता तो क्या राधा कृष्ण एक साथ होते,,
    रुक्मणि और सत्यभामा जैसी रानियों के साथ होते हुए,,
    नहीं ऐसा नहीं हो सकता,,

    देखो तो विज्ञान में ही प्रेम का जन्म हुआ है,,
    कभी गुरुत्वाकर्षण लगाके यह एक दूसरे को पास बुलाता,,
    तो वहीं एस्केप वेलोसिटी लगाके ये हम इतना दूर भेज देता,,जहां से हमारा आना असंभव होता,,
    कभी ये रसायनिक विज्ञान के एक्सेप्शनो की तरह बढ़ता ही जाता,,
    तो कभी भौतिक विज्ञान के सिद्धांत ऊर्जा संरक्षण के नियमो को साक्षी मानकर अपने क़दमों को बढ़ाता।।

    आप लोगो के विचारो का पता नहीं पर हां मेरे लिए उतना ही आकर्षण है मेरे प्रेम में,,
    जितना तो शायद गुरुत्वाकर्षण में भी नहीं,,
    बस यह दिखता नहीं शायद सुएडो फोर्स की तरह,,
    पर इसका मतलब ये भी नहीं कि उसका अस्तित्व है ही नहीं।

    -)अनुष्का

    #rachanaprati66 @rahat_samrat

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    " प्रेम प्रशंसा "
    मेरे लिए प्रेम की प्रशंसा विज्ञान में ही उत्पन्न होती है।
    (अनुशीर्षक पढ़ें)
    ©shayarana_girl