• dil_k_ahsaas 7w

    " ओस और ख्वाब "

    ख्वाब भी ओस की बूंँदों के जैसे होते हैं
    रात भर बेबाक सरगगोशियाँ करते हैं
    सुबह की पहली किरण के चूमते ही
    खफा हो कर कहीं छिपकर
    फिर रात का इंतज़ार करते है।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas