• mamtapoet 8w

    #rachanaprati116
    @jigna_a,@anandbarun,@anusugandh,@psprem,
    अगर यादों के गलियारों को
    बदलना मुमकिन हो पाता,
    तो हर याद खिलखिलाती,
    हर कली अनछुए स्पर्श पर
    अगर कछुए जैसे ख़ुद को अपने में समेट कर
    कठोर खोल ओढ़ पाती,
    जीवन्त हो उठता हर आँख का
    सलोना सा सपना,
    अगर ऐसा हो पाता, तो
    सच मैं गवाह बनना चाहती उस
    एक पल की।।

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    अगर...

    कुछ पल के लिए ही
    अगर,मैं तुम बन पाती,
    और तुम बन जाते मैं,
    अगर ऐसा सच में कभी होता,
    तो,
    तो तुम्हें अहसास होता,
    मेरी सुप्त होती उम्मीदों का, जो
    कभी पंख फैलाये सूरज को तकती थी।

    अगर ऐसा होता तो तुम्हें होता अहसास
    उन अनकही बातों के जज्बातों का
    जो शब्द बनने के पहले ही ,
    न जाने कितनी परतो के नीचे
    घुट कर रह गए।

    अगर ऐसा होता तो, तो तुम समझ पाते,
    कि क्यों बाँवरी सी तुम्हारे आगे पीछे घूमती थी
    क्योंकि शायद तुम्हारे पास होने
    को ही तुम्हारा सानिध्य समझ कर
    अपने मन को बहला पाऊँ।

    तुम्हारी तरह खुद में मशगूल होना
    नहीं सीखा मैंने,
    सपनों के रंगीन उलझे तारों से ही
    कैसे सजा ली है मैंने अपने मन की तस्वीर।।

    काश अगर एक बार भी तुम, मैं बनकर देख पाते.....
    ©mamtapoet