• tanish_ji 57w

    8-07-21(aaj kuch unke liye....jinke liye koi nhi likhta)

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    किन्नर......

    दुआएँ वो दे कर आबाद करते रहे....
    दुनियाँ के तानों से कान भरते रहे....
    बिगड़े हुए काम सरे आम बनते रहे....
    दुआएँ थी उनकी हमारे नाम बनते रहे....
    अपनाने मे जिसको समाज़ डरता रहा....
    भगवान जैसा काम wo किन्नर करते रहे.
    सभी की सुनी सब कुछ सुनी....और दुनिया वाले उनका जीना हराम करते रहे ।
    ©tanish_ji