• shayar_tera 36w

    बस बोल कर रह जाता हूँ,
    मालूम नहीं और ज़िन्दगी से क्या चाह रहा हूँ।

    अब ये ज़िन्दगी का बोझ मुझसे नहीं संभल रहा,
    मालूम नहीं मैं क्यों अपनी परेशानी रोज बढ़ा रहा हूँ।

    मेरे होने ना होने से फर्क कुछ लोगो को पड़ता हैं,
    मालूम नहीं आजकल ख़ालीपन में क्या से क्या सोचे जा रहा हूँ।

    देखते है ये वक़्त कब ढलता मेरे हक में,
    मालूम नहीं ऐसे ही क्यों ज़िंदा रहे जा रहा हूँ।

    ©shayar_tera