• prakriti_iipsaa 26w

    बाल सौंदर्य

    ऐ बहती शीतल मारुत सुन....
    मन उड़ता पंक्षी
    एहसास दीवानी तितली सी
    धड़कन संगीत-मधुर मेरे
    छू कर मुझको तूं भी सपने बुन.....

    खिलखिलाहट से उर-हर्ष भरे
    नयनों में प्रीत-समंदर लहरे
    शब्द सुखद निर्झर से
    ऐ ठहरे अम्बु स्वर भर ले
    पल-पल में कलकल की धुन.....

    अलक निराले अविरल से
    लहराते बलखाते मुखमंडल पे
    कुछ अविरत कुछ अल्हड़ से
    मानो प्रेम परस्पर पल्लवित हुए
    ऐ वारिद तूं भी अपनी अवनि चुन...

    होंठ-पंखुड़ी खुलते शोभित अभिमत ले
    दौड़े मधुकर सुमन छटा समझ कर के
    धरती-अम्बर मंजुल मंजुल
    ऐ तरुवर कोमल किसलय धर ले
    वन- उपवन में अब तूं भी खिल जा रे प्रसून...

    रूप निराली छटा बिखेरे
    चहके घर, आंगन में हो जो मेरे स्वर
    सविता की सुनहरी रश्मि, चंदा की मधु-चांदनी
    सब पलपल मुझमें सिमटे
    माँ तूं ममता भर ले, लोरी कर गुनगुन......

    ---श्याम
    ©prakriti_iipsaa