• hindinama 37w

    डॉ कुँअर बेचैन जी द्वारा लिखित कविता,
    माँ,
    वैसे तो माँ शब्द खुद में एक विशालतम साहित्य रखता है,
    माँ शब्द पर कुछ भी लिखना बहुत आसान बात नहीं है,
    फिर भी अनेकों प्रयास से, बहुत कवियों ने अच्छा अच्छा लिखा है,
    एक रचना यह भी) :

    आप सभी mirakee परिवार को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


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    माँ!
    तुम्हारे सज़ल आँचल ने
    धूप से हमको बचाया है।
    चाँदनी का घर बनाया है।

    तुम अमृत की धार प्यासों को
    ज्योति-रेखा सूरदासों को
    संधि को आशीष की कविता
    अस्मिता, मन के समासों को

    माँ!
    तुम्हारे तरल दृगजल ने
    तीर्थ-जल का मान पाया है
    सो गए मन को जगाया है।

    तुम थके मन को अथक लोरी
    प्यार से मनुहार की चोरी
    नित्य ढुलकाती रहीं हम पर
    दूध की दो गागरें कोरी

    माँ!
    तुम्हारे प्रीति के पल ने
    आँसुओं को भी हँसाया है
    बोलना मन को सिखाया है।
    ~कुँअर बेचैन