• instinct_se 22w

    थक जाती हूं सारी दुनियांकी जिम्मेदारियां संभालते संभालते।
    मैं बस अपने सपनोंके लिए जी रही हूं।
    मैं बस अपने सपनोंको जी रही हूं।
    रुक जाती हूं मै सपनों के ओर तेज चलते चलते।
    मैं बस तयारी करना चाहती हूं।
    मैं बस तैयार होरही हूं जीत के लिए।
    रोओ पड़ती हूं अपने आपको आईने में देखके कभी कभी।
    मैं बस बुरे सपनोंको भूलना चाहती हूं।
    मैं बस बुरे दिनोंको मिटाना चाहती हूं।
    हस पड़ती हूं अपने आपको आईने में देखके रोज अभी।
    मैं तो अब जी रही हूं सपनो को मेरे रोज अभी।
    चलते चलते रुकना भी मैंने छोड़ दिया।
    पर तैयारियां अभीभी चलरही है।
    थकना भूला दिया है मैन अब।
    जिम्मेदारियों को संभालना अब मेरी जिम्मेदारी नही।
    -Gaurav Bagul