• iofficialarmaan 19w

    अमर-इश्क़

    दास्तान ए इश्क़ अपना क्या सुनाऊ मैं,
    रोते रोते दर्द भी क्या गुनगुनाऊं मैं,
    तू हासिल नहीं मुझे तो दुनिया को पहचान तेरी क्या बताऊ मैं,
    मुकम्मल रहना चाहता हूँ तेरे संग मरने के बाद भी, इसलिए
    आखरी शायरी में अपना नाम (अमर) और तुझे (इश्क़) लिख जाऊ मैं।

    @lifelines_quotes