• anonymous_143 19w



    "सहमी सी आंखें P-2"

    बिना रुके उसने न जाने क्या क्या कह दिया। अभी सड़क पर सहम के चलने वाली लड़की को इतने कॉन्फिडेंस से बात करते सुन के आश्चर्य हो रहा था...।

    "लोकल हैं नहीं तो बताती इनको.... ज़ाहिल कहीं के" वो अपनी भड़ास निकालने में बिजी थी।

    "फ़िर जुबान भी खराब हो जाएगी" मैंने हंसते हुए कहा।
    "क्या?"
    "अरे! उनके बारे में बात करने से मुँह खराब हो रहा तो ...उन्हें दुकान के साथ पीने से जुबान ख़राब हो जाएगी।"

    उसने कुछ कहा नहीं, बस मुस्करा दिया।

    मुझे लगा कि मेरा सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा है।

    मैंने हाथों के इशारे से पूछा कि किधर चलना है.... उसने भी हाथों से इशारा कर दिया।

    हम चलने लगे उसके घर की तरफ। एक जेंटलमैन की तरह मैंने उसे सड़क से दूर रखा और ख़ुद सड़क वाली साइड पे आ गया।

    'उम्म...आप यहाँ क्या करती हैं?"
    "मैं शिक्षिका हूँ। यहाँ से कोई दस बारह किलोमीटर दूर मेरा विद्यालय है।"
    "अच्छा! मेरी बहन भी शिक्षिका है... अभी उसे ही उसके रूम पर छोड़ के आया। "

    "अच्छा अच्छा! कहाँ पे पोस्टिंग है?"

    ©anonymous_143