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    #Mirakee # Hindi Poetry # hidinama 3/11/2020 # 21:00 #

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    दिया और बाती

    दिया निर्जीव, बाती निर्जीव
    तेल प्राण फुंके बने सजीव..
    हो एकाकार कर्तव्य तत्पर
    शाश्वत सौम्य प्रकाश सत्वर..
    तेल से सासें जो मिली
    दिये ने खुद में समा ली..
    डूब गहरी जब बाती जली
    उजाले की तभी सौगात मिली..
    दिया खुद अंधेरी छाया रखे,
    बाती आखरी बूंद तक जले..
    पल पल अर्धांग जलते देखना
    उस तपीश को नि:शब्द धारण करना..
    कितना आसां है कहना मै बाती तू दिया
    अगर पतिपत्नी ने इस कटु सत्य को जीया..
    हर घर स्वर्ग हो जाये, हर घर स्वर्ग...!
    ©vipin_vn