• deeptimishra 5w

    कितनी सिलवटे हैं मेरे माथे पर
    कितने झख्मों पर मुस्कान चढ़ा रखा हैं
    अगर ठीक से देखू तो कुछ ठीक नहीं हैं
    और सब ठीक हैं..ये घर वालों को बता रखा हैं

    काश कोई जादू की झड़ी होती
    काश मैं कुछ धीरे धीरे बड़ी होती
    हाथ से सब कुछ यू फिसला हैं
    की अब तो अल्फाज भी बस में नहीं

    योद्धाओं की कहानी पढ़
    मैं लड़ने को तैयार हूं
    अंत में जीत ही होगी
    इस भ्रम से लाचार हु

    कई बातें हैं कहने को
    थोड़े आसूं बचे हैं बहनें को
    मखमली गाल पर गुलाबी सजा रखा हैं
    पूछ ना ले कोई हाल मेरा
    मजाक में सबको बहला रखा हैं

    दर्द किसके और कब कम हुए हैं
    ये तो ज़िंदगी का दिया एक तौफ्फा हैं
    अगर गिनती भर भी सांसे बची हो
    तो मैंने भी आखरी दम तक लड़ना सीखा हैं...!!

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    Samandar bahon me samaye nahi jate..,,
    Kuch kisse sbse btaye nahi jate ...!!


    ©deeptimishra