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    राज की बातें

    मेरी सबसे पहली हॉरर मूवी "जानी दुश्मन"थी जिसमें एक भूत रहता था जो डोली से उठा ले जाता था।अब मुझे देख कर बड़ा मजा आ रहा था कि लोग कैसे डर रहे हैं।

    शाम तक मैने सोचा कि क्यों ना दीदी को डरा दूं बड़ा मजा आयेगा।हमारे घर में बिजली नहीं थी उस टाइम , लालटेन जल रही थी।मैं दरवाजे के पीछे सफेद चादर ओढ़ कर बैठ गया था और मन ही मन मस्त था कि जैसे ही दीदी दरवाजा खोलेगी मैं उसके सामने आ जाऊंगा। तभी दरवाजे के पास किसी आने की आहट हुई और मैं सांस रोक हुए खड़ा था। जैसे ही दरवाजा खुला और मैं सफेद चादर लिए बाहर आ गया ,कोई चीखा और मैं दांत फाड़ कर हँसने लगा लेकिन ये हँसी ज्यादा देर के लिए नहीं थी। दीदी के जगह पर पापा थें।पापा डर गए थें उसके बाद मेरी कुटाई हुई।

    पापा के डरने के बाद एक चीज समझ में आ गई थी जब ये डर सकते हैं तो और भी डर सकते हैं। फिर सोचा अब घर में किसे डराऊंगा तो मेरी और भयंकर कुटाई होगी।अब किसी बाहर वाले को डराउंगा।

    मैं दीदी के साथ मिल कर प्लान बनाया कि क्यों ना बगल के अंकल जी को डराया जो हर शाम घूमने बाहर जाते हैं।शाम के 6 या 7 बज रहे थें जब कुछ साफ से नहीं दिखता, हमने एक बोरी में पत्ते भर कर सड़क पर रख दिए उसे देख कर लग रहा था जैसे कोई लेटा हुआ है।हम घर के किनारे छिप कर खड़े हो गए थें।जैसे ही अंकल जी हमारे घर के सामने से गुजरे दीदी खिलखिला कर हँसने लगी।अंकल जी इधर उधर देखने लगे तभी दीदी अंकल जी का नाम लेके हँसने लगी।अंकल जी हक्का बक्का थें कौन है अंधेरे में तभी बोरी की तरफ़ बढ़े फिर से दीदी हँसने लगी। अंकल जी बोरी के पास जा ही रहे थे तभी मैंने नकली रबर का बना हुआ सांप फेंक दिया। बेचारे डर कर भागने लगे और बोरी से फंस कर गिर गए।दीदी खिल खिला कर हँसने लगी। अंकल जी सबको तेज तेज चिल्ला कर बुलाने लगे। और फिर क्यासब आ गए और हम दोनों पकड़ गए।

    /सौरभ