• dipsisri 15w

    // मेरे हर शब्द,हर भावना,हर पंक्तियों में सिर्फ एक चीज वास करती है भले नाम उसके दो है-"प्रेम" और "तुम"//
    ~दीपसी

    अब तो डर लगता है कोई शिकायत ना करने लगे कि ये लड़की कितना प्रेम लिखेगी अब क्या करे भीतर इतना प्रेम है तो लिखना ही यही पड़ता है।��❤

    @amateur_skm Bhaiya likh diye finally.��

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    तुम।

    प्रीत का बंधन जो तुझसे जुड़ा,
    मैं तेरे कण-कण में बस गई पिया।

    संपूर्ण जगत को भुलाकर मैंने
    सिर्फ तेरा एक स्मरण किया।

    तेरे नयनों से प्रतिबिंब होती
    कौमुदी ने मेरी आत्मा को मोह लिया,
    उसी क्षण मैंने समर्पण किया
    पूरे जीवन को तेरे नयनों में पिया।

    मुख पर बैठी मुस्कान ने मेरे शब्दों
    को चुराया है,
    अब उस चोरी का भी क्या दोष जो
    तू इतने आनंद से मुसकाया है।

    लिख कर तुझे प्राप्त होता है परितोष
    कुछ ऐसे तू मेरे हृदय में छाया पिया।

    मेरे हर शब्द में एक तू ही सिर्फ समाया है,
    ये कैसा प्रेम का संमोहन तूने मुझ पर फैलाया है?

    प्रेम ने मुझे जटिल नहीं सदा आसान बनाया है,
    मगर प्रेम में मिले प्रश्नों ने हमेशा मुझे फंसाया है?

    अन्तिम सांसों तक तुझे लिखने का वादा ईश्वर
    ने शायद मुझसे कराया है,
    ये "प्रेम है या या ईश्वर",ये कैसा प्रश्न दिखाया है?


    ~दिव्यांशी