• tanish_ji 15w

    Sil-Sila

    हंसते हुए गले लगाया था उसने एक आख़री दफा....
    ज़िंदगी भर का गम दे गई वो बेवफ़ा.
    अबतो अपनों मे भी तन्हा सा रहता हूँ.
    दर्द-ए-जुदाई मै ख़ामोशी से सहता हूँ.
    बिछड़ने वाले तू आख़िर मिला ही क्यों था.
    ये झूठे प्यार का हमारे दरमियाँ सिलसिला क्यों था.
    तेरा अब ज़िक्र भी करना मुनासिब ना लगे...
    तेरा भी ज़ालिम बिन मेरे किसी से दिल ना लगे
    तड़प भी ऐसी हो ना मि मिलू ना सुकून मिले.
    रोना चाहे लाख तू..और रोने का मौक़ा ना मिले
    ©tanish_ji