• abhijames 13w

    मैं ज़िन्दगी के दिये जला रहा था, उम्र मेरी घटा रहा था, कोहिनूर जो दिल में था, उसी का अक्स मिटा रहा था.
    नींद में अपनी चुरा रहा था, ख्वाबों का झरोखा मिटा रहा था, सर्द रात थी मगर एक आँसू कोहरे में दबा रहा था.
    ©abhijames