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    तुम्हारे पाँव


    तुम्हारे महावर भरे पाँव
    इन्हें बचाकर रखना जमीन पर
    बिखरे हुए हैं स्मृतियों के घास
    उसमें घूम रहे हैं साँप
    ऐसे साँप जो प्रेम में लहर खाते हैं
    देखना कहीं वो पैर में ना लिपटें,
    अगर पाँव रखना ही तो रखती आना
    उन मछलियों पर
    जिस नदी के किनारे तुम कहती थी
    प्रेम कितना भी अभागा कर दे
    नदी भर का दुःख अंजुरी से पीने को देगा ही

    कोई और ना आए
    उन घोंसलों को उठा लेना
    जहां चिड़िया गूंगी बैठी हो
    जिनकी मां मारी जाती है बहेलियों के तीर से
    मैं वहीं बन बैठा रहूंगा
    एक ठूंठ सा पेड़
    तुम आना अपने पाँव रखना
    मेरे पाँव पर
    बसा देना एक नया संसार

    तुम्हारे महावर भरे पाँव


    /सौरभ