• pulkit_srivastava 121w

    महामारी (Mahamari)



    ये पूरे विश्व को आज क्या है हुआ
    इंसान ही बन गया है मौत का कुआं
    धरती मां भी उसके आगे हारी
    कैसी आ गई है ये महामारी
    चेहल पहल तो आज भी है मगर उन बंद दरवाजों में
    इस महामारी ने बांध दिया हमको सोशल डिस्टैंसिंग के रिवाज़ो में
    लाखों के पार पहुंच गया है अब मौत का सिलसिला
    एक मस्क ही तो है जो हमारे साथ आके घुलमिला
    इस महामारी से पूरे विश्व की ज़रूर होगी जीत
    बस निभानी होगी लॉकडाउन की रीत
    एक दिन आएगा कि पूरी दुनिया मुस्कुराएगी
    इस जीत के गीत सुनाएगी
    और कामयाब कहलाएगी ।।



    ©Pulkit Srivastava