• aj_potter100 8w

    फ़ासला इतना भी ना था ,
    मालूम जितना ये हो रहा है,
    ख़्वाबों को सारे कत्ल कर
    भला कौन आख़िर सो रहा है,
    बैचैन तुम हो, बे-उम्मीद हम,
    जिद्दी थे तुम और मजबूर हम,
    ग़ायब है नींद, आंखें है नम,
    बेबस है दिल आज रो रहा है.
    ©aj_potter100