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Reposts
  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    Collecting the reposts by roaming around
    Is not beneficial until you don't find words
    More than just "Well written" without a read

    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    I never share my pain with my family or loved ones,
    I keep few people in reserve list for doing that
    As I can't take risk to lose my people after sharing.

    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    जिस चोली को आपने....अपनों के लिये खरीदा वो इज्ज़त थी,
    और जिस चोली को गैर बन कर देखा वो महज आपकी हवस।

    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    दुपट्टा

    दुपट्टा ओढ़ कर रोने वाले को हम,
    मर्द नहीं,एक नपुंसक ही कहते हैं।

    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    मुद्दतों बाद आज फिर से बंजर बनने का फरमान आया है,
    शिद्दत से जिन्हें नज़र दो,उनसे खंजर रूपी वरदान आया है।

    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    गाना

    बन के बादल.......बरस जा पिया मन तू रे,
    कि कह उठे जग ये सारा हूँ मैं आदत तेरी,
    बन के बादल......बरस जा पिया मन तू रे।

    साँसें हो न जमीं..............तेरे पग के तले,
    बन के बादल......बरस जा पिया मन तू रे।

    कभी कहना नहीं........कि तू हो जा दफ़ा,
    मैं नहीं जब हूँ तेरा कोई बेवफा,
    बन के बादल......बरस जा पिया मन तू रे।

    शौक हैं न मेरे....कि कई हों अंग-ए- नफा,
    बन के बादल......बरस जा पिया मन तू रे।

    कर शिकायत.... पर मुझसे न छीनो जमीं,
    बन के बादल......बरस जा पिया मन तू रे।

    हैं मन जो लहर..........आकर तुम सुन ले,
    बन के बादल......बरस जा पिया मन तू रे।

    हो भी गुस्सा अगर..... तो भी पूजता चलूँ,
    दो न राहत अगर.........तो भी बढ़ता चलूँ,
    बन के बादल......बरस जा पिया मन तू रे।

    खुशी में बनूँ...............या मैं ना एक छवि,
    गम और तम में रहूंगा.............मैं तेरा रवि,
    बन के बादल.......बरस जा पिया मन तू रे।


    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    नुमाइशों का अगर शौक़ होता तो हम भी नर्तन करते,
    मन उपजे अपने पल- पल के भावों संग कीर्तन नहीं।

    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    लोग कला को नहीं खेला को पूजते हैं।

    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    गाना

    जलते हैं मन जो रातों में,
    उनको.......बेकदर न करो,
    रख-ए-फितूर।

    जुड़ने के क्या हैं फायदे,
    जो बीच मोड़ जाना पड़े,
    सुन तो हुजूर!

    जुड़ने के अगर न फायदे,
    तो अब छोड़ कल न मरो,
    रख-ए-फितूर।

    यादों से चिढ़ाता हूँ मन को,
    सब्रों से सुलाता हूँ तन को,
    आया न करो तुम यादों में,
    कि अश्क़ों संग बहाना पड़े,
    सुन तो हुजूर।

    सह लूँगा मैं....खामोशी को,
    ताउम्र बंद......नज़र न करो,
    सुन तो हुजूर।

    आओ न तुम....इन यादों में,
    झूठे अपने....तुम वायदों में,
    कि आहों से...ज़हर मैं पियूँ,
    सुन तू हुजूर।

    भूल से ज्यादा...माफ़ी हूँ मैं,
    नाम समझ के न पिया करो,
    मैं न कुसूर!

    ©pragatisheel_sadhak_bihari

  • pragatisheel_sadhak_bihari 136w

    मीठे शब्दों से इतर..........आप सच रूपी ज़हर उगलो,
    ताकि नकाब का पर्दा उठाने में लोग वक्त जाया न करें।

    ©pragatisheel_sadhak_bihari