Grid View
List View
  • pragti 5d

    हर स्त्री हिमालय सी चोटियों पर फतह हासिल कर अपने नाम का झंडा नही लहराती / कुछ स्त्रियां हर रोज हासिल करती है फतह ऐसी कई चोटियों पर और लौटती है सिर पर हरी जिंदगी की गठरी ले,बिना अपने नाम का झंडा लगाए/इनके सिर पर रखी गठरी इनके साहस ,हिम्मत को दर्शाती है,पर सबकी नजरों में ये आम है/
    ©pragti

  • pragti 4w

    Yaado ke koi pankh nhi ki udd jaye wo dur khi ,aaye n phir nazar kabhi ,balki yaadein to wo pankshi jo baitha h abhi whi jnma h jha jagah whi. Yaado ko koi uda (bhula) sakta nhi , kosis kr le chahe jitni .maar(bhula) sake n koi kabhi mn me le ke krodh,irshya,y glaani chahe jitni. yaadein chahe aachi ho ya buri bdi ,dikh jaati h hmesha hi ho bnd aankhe y ho khuli. Kr dete h aankho ko nam kabhi ,la deti h ye honto pe kbhi hasi

  • pragti 7w

    सुकून के कुछ पल दे दो , बस मुझे मेरा घर दे दो/
    ©pragti

  • pragti 8w

    सड़क

    कभी कभी सड़क पर एक साथ कई दृश्य नज़र आते है,कभी कुछ नन्हे बच्चे खिलौने खरीदते तो कुछ नन्हे हाथ खिलौने बेचते नजर आते है/कुछ नन्हे कंधे किताबे ले स्कूल की तरफ जा रहे होते है तो कुछ बच्चे उम्र से पहले बड़े हो कमा रहे होते है/सभी सड़क पे पथिक बने होते है, तो कही बचपन,जवानी,बुढापा साथ चल रहे होते है/कभी कोई बुजुर्ग बच्चो के साथ टहल रहे होते है तो कभी कुछ बुजुर्ग अकेले खड़े हो अपने लिए दया भावना की अपेक्षा लिए भोजन की ववैस्ता कर रहे होते है,कभी कोई मालिक अपनी बड़ी गाड़ियों से जा रहे होते है ,और कभी कोई रिक्शा चला अपनी जीविका चला रहे होते है/ ,कभी कुछ ऊंचे घर के जोड़े अपनी गाड़ियों में लड़ रहे होते है तो कही कुछ जोड़े दिन भर की कमाई लिए मुस्कुराते हुए बच्चे को कंधे पे बिठाए पैदल चल रहे होते है / कभी कोई कही पहुंचने की जल्दबाजी में होता है तो कभी कोई सुकून से किनारे खड़े होके इंतजार कर रहा होता है/रात सड़क कुछ सुनसान होती है ,लोग अपने आशियाने की ओर , आने वाले कल के सपने लिए बढ़ रहे होते है तो कुछ सड़क पे किनारे बस किसी तरह रात बिताने की ववैस्ता कर रहे होते है/सड़क सिर्फ सड़क नही होती बल्कि बहुत सी जिंदगियों का आइना होती है ,निर्भर देखने वालो पे करता है की वो कभी किनारे खड़े हो ये सब देखते भी है या सड़क उनके लिए कही पहुंचने का सिर्फ जरिया बन रह जाती है/

  • pragti 15w

    Jo nikl rha hai haantho se ye waqt bahut hi khash h ,jo gujr rha hai tezi se ye daur nhi jajbaat hai

  • pragti 19w

    Kismat me apni door aa ke kamana tha,. Tumhi bta do haal wha k kbhi wo sahar bhi hamara tha ,

  • pragti 20w

    Jaha din gujrna muskli tha wha saal gujre ,lgta tha muskil safar ,kaise khe ki kaise kaise halat gujre.

  • pragti 20w

    Tham jayegi ki khoz yhi aa ke ki palsafe abhi lambe jayenge,umr bitegi kisi ke sath y ,daur zindgi ke sbhi yu e nikl jayenge.

  • pragti 27w

    Jahan me jikar ho khud ka ye bhi jaruri hai,na soche apne baare me esi bhi kya majboori hai.
    ©pragti

  • pragti 30w

    Sabka khayal rakho pr swayam ko bhi yaad rakho
    ©pragti