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Short Temper गढ़वाली ब्राह्मण instaID@mr.semi92

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  • ps_originals 1w

    दर्द हद से गुज़र रहा है मैं चीख भी नही पा रहा हूँ
    कहने को हूँ जिंदा मगर अंदर से मरता जा रहा हूँ...

    वक़्त भी खिलाफ है अपने भी साथ नही,
    पिंजरे में कैद एक परिंदे सा फड़फड़ा रहा हूँ...

    मन बेचैन है रूह भी चीख पुकार रही है,
    क्या गुनाह किया किस गुनाह की सजा पा रहा हूँ...

    दौलत से ही सब रिश्ते नाते अपने बनते है तो,
    फिर किसलिये रिश्तों के ढोंग निभाये जा रहा हूँ...

    अपना कह देने भर से कोई अपना नही हो जाता,
    अपने ही कातिल है मेरे खाबों के अपनो के हाथों ही जलाया जा रहा हूँ...

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  • ps_originals 8w

    जितना मैंने बोला है अबतक,
    सिर्फ उससे तुम बितक गये,
    सोचो, जो मैंने कहा ही नही,
    फिर वो कितना तीखा होगा....


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  • ps_originals 8w

    एक नए सफर की शुरुआत करने जा रहा हूँ
    मैं अपने उत्तराखंड, अपने नए घर जा रहा हूँ...

    जिन यारों ने हर पल निभाया है साथ मेरा,
    उनकी यादों का इस दिल मे लिये शजर जा रहा हूँ...

    दिल मे गम है और आँखों मे खुशी के आँसू भी,
    जिगरी यारों को छोड़कर, नए शहर जा रहा हूँ...

    होगी शहरों की दूरी मगर दिलों के फासले ना होंगे,
    मेरे यारों तुमको बताते हुए मैं ये खबर जा रहा हूँ...

    मिलेंगे फिर कभी किसी मोड़ पर इसी आस पर,
    कुछ यादें पुरानी किये तुम्हारी नज़र जा रहा हूँ...

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  • ps_originals 11w

    एक तारे के टूट जाने से,
    खाली तो ये आसमान नही होता...
    जो होता वो मेरा जिंदगी में तो,
    इस कदर तो जहान मेरा वीरान नही होता...

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  • ps_originals 13w

    गमो को अपने कुछ इस तरह छुपाता हूँ मैं,
    पूछे जो कोई तो, झूठी कहानी बताता हूँ मैं...

    गम बाँटने की आदत बदली है कुछ ऐसे मैंने,
    दर्द होने पर अपने ही तकिये से लिपट जाता हूँ मैं...

    अब हर शख्स को एक नई मुस्कान देता हूँ रोज,
    इस तरह ना जाने कितने किरदार निभाता हूँ मैं...

    लोगो की भीड़ से इस कदर उकता चुका हूँ के,
    अब तन्हा ही अक्सर अपना वक़्त बिताता हूँ मैं...

    देखो अब दूर रहो छेड़ा ना करो मुझे तुम सब,
    आजकल छोटी सी बात पर बिफर जाता हूँ मैं...

    वो दौर और था एक आवाज़ में हाज़िर होता था,
    ना तुमने निभाई दोस्ती,और ना अब निभाता हूँ मैं...

    तुम अपनी दुनिया मे रहो, और मैं खुद में रहता हूँ
    ना तुम कुछ कहना अब,और ना कुछ बताता हूँ मैं...

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  • ps_originals 13w

    इश्क़ भी हो चला है उनसे
    खोने का अब डर भी सताने लगा है,

    जितना दूर रहने लगे हैं उनसे,
    उतना ही ख्याल उनका आने लगा है...

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  • ps_originals 13w

    तेरा दिया ज़ख्म तेरी याद दिला रहा था,
    और मैं ज़ख्म देखकर बस मुस्का रहा था...

    गैरों को तेरी तस्वीर माँगते देखा किसी से तो,
    ना जाने मेरे सीने में क्यों उबाल आ रहा था...

    मुझसे पहले ही उसको कोई ले जा चुका था,
    जिसको फिजूल ही मैं हाल-ए-दिल सुना रहा था...

    अब जो खालीपन सा महसूस हुआ यूँ फिर से,
    कुरेदा ज़ख्म रातभर, और फिर खुद मरहम भी लगा रहा था...

    अभी दिल की बात ज़ुबाँ पर आने को ही थी के,
    देखा वो शख्स किसी को बाँहों में लिये जा रहा था...

    मैंने रकीब को कहा, सुनो उसका ख्याल रखना,
    वो जो शख्स मुझे छोड़कर दिल से मुस्कुरा रहा था...

    मोहब्बत को मेरी उसने मजाक का नाम दे दिया,
    मेरा मजाक बनाने में शायद उसको बड़ा मजा आ रहा था...

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  • ps_originals 13w

    अपने ही दोस्त से दुश्मनी अच्छी नही ए दोस्त,
    एक दोस्त को दूसरे दोस्त के कई राज पता होते है...

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  • ps_originals 14w

    थोड़ा थोड़ा अंदर से रोज मर रहा हूँ मै,
    काश के बाहर से भी एक दिन मर जाऊँ मैं...

    ये तमाशा जो मेरे अपनो ने रोज का लगा रखा है,
    इस तमाशे से बचने के लिए अब किधर जाऊँ मैं...

    हर रोज खुदकुशी का ख्याल आता है अब तो,
    दिल रोकता है, दिमाग मगर कहता है कर जाऊँ मैं...

    जिंदगी इस क़दर तमाशा बन गयी,
    के अब तो खंजर खुद कहता है,
    हिम्मत नही तुझमें जो तो,
    तेरे सीने में खुद उतर जाऊँ मैं...

    बोझ दिलो-दिमाग पर अब सहा नही जाता है,
    कभी सो जाऊँ तो काश ऐसा हो,
    हमेशा को एक गहरी नींद में उतर जाऊँ मैं...

    ज़हर जो बन रहा है, क्रोध को पालने पर अंदर,
    कहीं इस ज़हर को पीकर ही ना मर जाऊँ मैं...

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  • ps_originals 19w

    जिस्म से अपनी ये जान निकाल सकता हूँ मैं,
    तेरे हर गम को अपने अंदर पाल सकता हूँ मैं...

    गमो से परेशान हूँ इस कदर के मौत चाहता हूँ,
    वक़्त बदले तो मौत को अपनी टाल सकता हूँ मैं...

    हर शख्स जो भुला मुझे, मैंने भी उसे छोड़ दिया,
    अब इससे जादा गुस्सा क्या निकाल सकता हूँ मैं...

    गर्दिशों के दिनों में ही यारो रिश्तों की परख होती है,
    बुलंदि पर दिल बहलाने को तो कुत्ता भी पाल सकता हूँ मैं...

    बस खामोश हूँ के कभी कोई रिश्ता रहा है तुमसे,
    इज़्ज़त तो तुम्हारी भी बेतहाशा उछाल सकता हूँ मैं...

    इतना ना गुमान कर, मेरा भी वक़्त आएगा कभी,
    तब तुम्हारे भी खून के आँसू निकाल सकता हूँ मैं...

    #SeMiWriteups
    ©ps_originals