rahulkhatri

आइए कहानी सुनाते है ...

Grid View
List View
  • rahulkhatri 18w

    जज़्बात

    ये जो तुम मेरे जज्बातों को नहीं समझने का ढोंग करती हो
    क्या तुम भी फिरसे इश्क करने से डरती हो !
    ©rahulkhatri

  • rahulkhatri 127w

    नासमझ

    नासमझ हूं अक्सर सुलझे धागो में भी उलझ जाता हूं
    दुनिया को दिखाने के लिए अक्सर खुल के मुस्कुरा देता हूं ...
    ©rahulkhatri

  • rahulkhatri 135w

    उथल पुथल के इस दौर में ,
    एक पल के लिए थमना चाहता हूं
    में बिखरे टुकड़े फिर से जोड़ना चाहता हूं...

  • rahulkhatri 154w

    तोहफ़ा

    मां के पेट से तो इंसानियत ही सीख के आया था
    नफ़रत तो इस दुनिया का तोहफा है ।।
    ©rahulkhatri

  • rahulkhatri 162w

    इंसानियत

    आओ कब्रिस्तान सी इस बस्ती में कुछ पल गुजारते है
    मुर्दों के इस शहर में इंसानियत की नब्ज टटोलते है
    ©rahulkhatri

  • rahulkhatri 163w

    जंगल

    यूंही तो नहीं छोड़ गए होंगे घरौंदे सारे
    कोई तो जल्लाद बनके आया होगा ,
    यूंही नहीं चिलाए होंगे कबूतर सारे जंगल के
    कोई तो मांस नोचने जंगल में आया होगा ||
    ©rahulkhatri

  • rahulkhatri 164w

    दोस्ती

    मिट्टी के मटके में भरे थे दोस्त सारे मैंने
    मौसम बदलते रहे, दोस्ती रीसती चली गई
    ©rahulkhatri

  • rahulkhatri 165w

    खत

    माना कि कुछ गिले है कुछ शिकवे है हम दोनों में
    एक बार में खत में लिख दो
    ये बार बार में गिल्ट ट्रिप मत दो
    ©rahulkhatri

  • rahulkhatri 169w

    चांद

    देख तुझे इन रंगो में हर रंग नया सा लगता है
    घोर अंधेरी रातों में चांद भी खिला खिला सा लगता है
    ©rahulkhatri

  • rahulkhatri 171w

    बचपन

    बिजलियों सी कड़कती थी , वो तो मोहल्ले में ही बसती थी
    अरे साहब सुकून भरी सांसे थी, बचपन में ही मिलती थी
    ©rahulkhatri