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Reposts
  • rajni_pant 19w

    जब आपके हाथ काम करते हैं तो खामोशी होठों पर शोभा पाती है

  • rajni_pant 64w

    नव संवत्सर विक्रम संवत 2078 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

  • rajni_pant 68w

    फूलदेई

    उत्तराखंड के लोक पर्व फूलदेई की हार्दिक शुभकामनाएं
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 71w

    मैं जहाँ बिखरा हूँ, उस पर है सबकी नज़र
    उस ऊँचाई को भी तो देखो जहाँ से मैं गिरा हूं!!

  • rajni_pant 73w

    आनंद आध्यात्मिक उद्योग का फल है।

  • rajni_pant 92w

    आँखें

    ये आँखें बेजुबान की जुबान हैं
    बिना बोले सब कुछ बता देती हैं।
    बिना कहे सबकुछ समझा देती हैं,
    कभी करुणा, कभी प्रेम, कभी गुस्सा तो कभी तिरस्कार।
    कितना कुछ जानती और समझती हैं ये आँखें।
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 101w

    विनम्रता से ही नैतिकता आती है
    और
    जीवन में सादगी आती है !!!
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 106w

    पिता

    पिता, एक ऐसा व्यक्तित्व
    जिसकी गरिमामयी उपस्थिति ही
    परिवार के एकीकरण एवं स्नेह का पर्याय है
    जिसकी गंभीर गर्जना से पूर्ण आवाज
    अनुशासन का पर्याय है
    जिसका सूक्ष्म अवलोकन
    आपसी सद्भाव का प्रतीक है
    जिसकी निर्मल मुस्कान
    परिवार की संपन्नता का पर्याय है
    जो संपूर्ण परिवार को वटवृक्ष के समान
    आश्रय देता है।
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 107w

    आत्मनिर्भरता

    आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी है
    जब हमारी बीमारी मे दूसरे हमारी मदद करते हैं,
    जब QUARTINE PERIOD. मे दूसरे हमारी आवश्यकता की पूर्ति करते हैं ,
    जब हम अपनी छोटी -छोटी आवश्यकता की पूर्ति के लिए जानकार पर निर्भर रहते हैं,
    क्या सही मायनों में हम आत्मनिर्भरता का दंभ तो नहीं भर रहे?
    वस्तुतः
    वास्तविक आत्मनिर्भरता तो तब है जब हम
    दूसरों की निःस्वार्थ भाव से सेवा कर सकें,
    स्वयं सन्मार्ग के आचरण के साथ दूसरों को भी प्रेरणा दे सकें
    आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वावलंबी बनाकर,
    लोगों के जीवन में खुशियां बाँटकर
    सही मायनों में जियो और जीने दो की भावना ही
    आत्मनिर्भरता है
    ©rajni_pant

  • rajni_pant 110w

    आओ ! चलें जंगल की ओर
    प्रकृति की ओर
    प्रकृति से दूरी ही
    आज हमें अपनों से दूर कर रही है ।
    ©rajni_pant