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  • rani_shri 4h

    दिल, रूह,ज़िंदगी,जान सब वार चुकी हूँ मैं,
    वक्त,कायनात और ख़ुद को हार चुकी हूँ मैं।
    ©rani_shri

  • rani_shri 14h

    Never run after the one
    Who can't even walk a single step with you..
    I repeat never.
    ©rani_shri

  • rani_shri 16h

    हमें सुधारने की कोशिशें बेकार जाएंगी सारी,
    हमने बिगड़ने की सारा बंदोबस्त ख़ुद किया है।
    ~R.S.

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    किस्मत, मोहब्बत, कायनात सबसे लड़ चुके हैं हम,
    ख़ुदा भी सुधार न सके इस कदर बिगड़ चुके हैं हम।
    ©rani_shri

  • rani_shri 1d

    मुहब्बत ऐसी पाक सी,
    फ़िर भी रही ख़ाक सी।
    ~ R.S.

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    हाथ हमारा कभी थामकर रखा भी नहीं और छोड़ा भी नहीं,
    ऐसा किया उसने के दिल तोड़ भी दिया और तोड़ा भी नहीं।
    ©rani_shri

  • rani_shri 1d

    छंद- झूलना
    चरण-4(समतुकांत)
    मात्रा- 26
    यति- 7,7,7,5,
    (चरणांत- गुरू लघु)
    ********************
    @gunjit_jain

    Lovely writing, so much talent, words like anklets, he's the base,
    New hope which can be felt, that is trust, he's the world.
    Manners like New and first ray of sun, praised in world, like purest form of gold,
    Behavior like Radiantly words, hands joined in worship, the words are irrigated.
    ~R.S.

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    गुंजित

    लेखन मधुर, प्रतिभा प्रचुर, वाचन नुपुर, आधार।
    नव आस जो, आभास हो, विश्वास सो, संसार।
    आहान नव, गुणगान भव, पीयूष द्रव, आचार।।
    गुंजित कथन, वंदित नमन, सिंचित वचन, व्यवहार।।
    ©रानी श्री

  • rani_shri 2d

    आंखों में जो ख़्वाब थे वो आंखों के सामने तोड़ दिये गए,
    जब बंधन बिन उसकी मर्ज़ी के कहीं और जोड़ दिये गए।

    ©rani_shri

  • rani_shri 2d

    किन्हीं दो अलग ट्रेनों में सफ़र करते हुए जब एक दूसरे के बगल से गुज़रेंगे तो कहीं हमारे दिलों की धड़कनें रुक न जाएं। मगर शायद ऐसा ना हो क्योंकि हमारी ट्रेनों को एक ही समय पर एक ही जगह पर रुकना ही होगा क्योंकि ये हम ही तय करेंगे कि वो ट्रेन वही रुकेगी जहाँ हमने सोच रखा है।

    न तुम मेरे शहर आ पाए ना मैं तुम्हारे लेकिन ये शहर हमारे मिलन का गवाह होगा। और शायद यही शहर होगा हमारी मुहब्बत का शहर जहाँ हमसे ज़्यादा हमारे इश्क का रंग और उसकी खुशबू यहाँ की फ़िज़ाओं में फैल जाएंगे। लाज़मी है कि वो शायद हमारी पहली मुलाकात हो जो कितने वक्त, कितने इल्तज़ा और कितने इंतज़ार के बाद नसीब होगी हमें।

    अल्ताफ राजा के गाने को मन के किसी कोने में दरकिनार करते हुए कुछ यूं हीं मिल लेंगे।

    इश्क़ और प्यार का मज़ा लीजिए थोड़ा इन्तज़ार का मज़ा लीजिए
    दिल-ए-बेकरार का मज़ा लीजिए थोड़ा इन्तज़ार का मज़ा लीजिए
    मज़ा लीजिए मज़ा लीजिए मज़ा लीजिए।

    इंतज़ार के पल बहुत मुश्किल होंगे मगर जब दोनों के कदम साथ ही वहाँ उतरेंगे तो शायद उनकी आहटों से हमारे दिल की धड़कन बढ़ जाए। और दिल की धड़कन बढ़ जाए तो शायद ये भी हो कि थोड़े मदहोश से हो जाएं हम।

    वो शहर उससे पहले कभी खूबसूरत नहीं हुआ होगा मगर उस दिन शायद उस शहर से बेहतर कोई शहर होगा भी नहीं क्योंकि वहाँ होठों पर मुस्कान और शायद आंखों में अश्क भी लिये होंगे हम। थोड़ी भीड़ बढ़ जाने पर ये भी हो जाए कि हमारी आंखें एक दूसरे को बेसब्री से ढूंढें। ये वही बेसब्री होगी जो इतने दिन तक सब्र धरी थी और आज वो सारे सब्र एक साथ टूट जाएंगे। शायद हमारी सारी कमियां भी पूरी हो जाएंगी एक दूसरे से मिलकर।

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    और जब हम एक दूसरे के सामने होंगे तो जो सोच रखा था कि दौड़कर एक दूसरे के गले लग लेंगे मगर ये ना हो और ये हो जाए कि मैं अपने घुटनों के बल बैठ जाऊँ जैसे कि कोई इबादत के लिए बैठता है अपने ख़ुदा के सामने अपने प्यार का इज़हार करने। और फ़िर एक दूसरे को देखकर मन में ये होगा कि हाँ ये वही है जिसे इतने दिनों से बस तस्वीरों में देखते आ रहे हैं।

    उस अंजान शहर में हाथों में हाथ डाले ऐसे घूमेंगे जैसे वो शहर हमारा हो और हम उस शहर के। गर कहीं खोने का डर होगा तो वो बस एक दूसरे की आंखों में छलकते मोहब्बत में। वक्त बस हमारे लिये रुकता सा रहेगा। और दरमियान तब शायद तुम्हें और भी एहसास हो उस प्यार का। क्योंकि तुम्हारे हिसाब से बिना मिले न मोहब्बत होती है न उसका एहसास। मगर मैंने तो बहुत पहले से मन में तुम्हारे एहसास की परिकल्पना कर रखी है कि शायद तुम्हारा छुअन ऐसा हो और तुम्हारा एहसास वैसा। क्या पता तुम सच में वैसे ही हो जैसा मैंने सोचा।

    न तुम जानो न मैं,बस ख़ुदा जाने ये राज़ कैसा गहरा सा है,
    मुहब्बत गुज़र रही है बगल से हमारे और वक्त ठहरा सा है।

    जानते हो इन पलों में सबसे बुरा क्या होगा,उनका बीत जाना और हमारी मुहब्बत भी पुरानी होकर गुज़रती रहेगी। मगर जुदा होने से पहले हम हर पल , हर एहसास को ख़ुद में भर लेंगे एक अंतरिम सीमा तक जो शायद असीमित हो। और फ़िर वापस जाते हुए हम देखते रहेंगे एक दूसरे को एकटक अपलक। और तब हमारी ट्रेन अपने मुताबिक चलेंगी और वक्त हमारे मनों के खिलाफ़....

    बदल जाएगा वो शहर अपने पुराने रूप में और हम एक दूसरे में...

    ~रानी श्री

  • rani_shri 3d

    *छंद में मेरा सबसे पहला प्रयास*
    सादर समीक्षार्थ

    छंद- महादेव
    *******************
    छंद- झूलना
    चरण-4(समतुकांत)
    मात्रा- 26
    यति- 7,7,7,5,
    (चरणांत- गुरू लघु)
    ********************

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    महादेव

    शम्भू भजन, सरसिज चरन, मन क्रम वचन, अतिरेक l
    शंकर समय, शिव ही प्रलय, शंभू विजय ,अभिषेक।।
    रमनीय अति,संसार गति,सुंदर सुमति,हो एक।
    शंकर शरण, जीवन मरण, भय का हरण ,हिय नेक।।
    ©रानी_श्री

  • rani_shri 3d

    जितना मैं जताती हूँ इश्क ये,उतना तो बस मेरा इरादा है,
    यकीन मानो मैं जितना बताती हूँ ये उससे कहीं ज़्यादा है।
    ©rani_shri

  • rani_shri 3d

    Happy birthday bhaiya @undetectable_liar ����������������������������

    याद है हम जब पहली बार यहाँ मिले थे। कितना गुरूर था मुझमें , न किसी से कोई बात करती थी ना किसी को फॉलो। बस एक दोस्त बना था आपसे पहले। और जब एक पोस्ट पर हम लोगों की बातें शुरू हुईं और इतनी हुई कि मिराकी का रिकॉर्ड बन गया। सबने एक एक पोस्ट की थी स्क्रीनशॉट लेकर उस पोस्ट की। और फ़िर हमारा किक ऐप पर बात करना और फ़िर वहाँ से फोन का सफ़र (फोन पर आपका हाय बच्चा! कैसी हो? बोलना अभी भी कोनों में गूंज रहा)। हम लोग मिराकी पर उस ज़माने से हैं जिस वक्त यहाँ बहुत अच्छे लोग थे और जिनके साथ अच्छी यादें बन गयीं। एक दूसरे की पोस्ट को लाइक कमेंट और रिपोस्ट देना और अपनी पोस्ट पर टैग करना।

    आप पहले शख़्स हैं मिराकी पे और मेरी ज़िंदगी में भी जो ऑनलाइन प्लैटफॉर्म पर मेरा दोस्त नहीं बल्कि भाई बना। और भाई भी ऐसा वैसा नहीं एकदम पक्के वाला। हमारी बात पहले के मुकाबले कम होती है लेकिन हमारा रिश्ता आज भी उसी मजबूती से जुड़ा है। तब से लेकर अब तक बहुत कुछ बदला, मिला, छूटा, भुलाया गया, अपनाया गया मगर हम दोंनो एकदम कॉनस्टैंट हैं। शायद हम दोनों ने ही जानबूझकर कर ऐसा रिश्ता चुनना ज़रूरी समझा जो दूर का हो मगर जिसमें समझ हो। और फ़िर आप मेरे भईया और मैं आपकी छुटकी और बच्चा। पता है आज तक मैंने आपके और विनीत भईया के सिवा किसी और को मुझे छुटकी बोलने नहीं दिया।

    कितना तंग करती हूँ मैं आपको कि भईया शादी कर लो भाभी ले आओ और आप भी हंसते हुए कहते हो हाँ पागल उमर होगी तब ना। अब आप ही बताओ बुढ़ापे में शादी कौन करता है। ओके सॉरी डांटना मत, जैसे हर बार डांटते हो जब महीनों हमारी बातें नहीं हो पातीं।

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    जानते हो आप मेरी ज़िंदगी में बहुत मायने रखते हो। मैं कहती नहीं फ़िर भी। ये दिल का रिश्ता बहुत खास है। आपकी सबसे अच्छी बात ये है कि आपका दिल बहुत साफ है और ख़ुद किसी भी हाल में रहो हमेशा सबकी मदद करते हो। आप उन लोगों में से हैं जिन्हें खोने में डर तो बहुत लगता है मुझे। और वो डर उस दिन और भी बढ़ गया जिस दिन हम मिले, मेरे शहर में।

    याद है कितना प्यारा दिन था जब दो साल में पहली बार आपसे मिली। लगा था कि नहीं मिल सकूंगी पर मिल ही लिये हम। वो चंद पल ही बहुत थे मेरे लिए कि जिससे इतने दिनों बात करते आई आज वो सामने आ ही गया। और उस वक्त के हर पल, हर तनाव हर खिंचाव, हर याद और हर दृश्य को हमनें अपने अपने दिलों में कैद कर लिया अगली बार मिलने तक के लिए। घर जाकर याद आया कि मेरे बैग में अखंड राखी रखी हुई थी जो आपको बांधना भूल गयी। और वो जो चॉकलेट लाए थे आप मेरे लिये, उसे खाते खाते वाकई मेरा दिल भर गया पर वो ख़त्म नहीं हुई। उसमें आपके प्यार का कुछ कतरा था जो मैंने दिल में रख लिया।

    आज एक और दिन आया है बीतने को और ये बताने को कि आपकी ज़िंदगी की एक और उमर आपने पार कर ली और एक और वसंत निकल गया आपके उमर का। मुझे हमेशा से ये कंफ्यूजन रहा की आपका बर्थ डेट कौन सा है पर इस बार याद रहा। पर आप मेरी तरह भुलक्कड़ नहीं हो। पर मैं भी नहीं भूली।

    हैप्पी बर्थ-डे भईया। भगवान करे आप ज़िंदगी के हर मुकाम पर सफलता पाओ। बस खुश, स्वस्थ और मस्ती में रहो आप यही मेरी दुआ है। बहुत सारा प्यार। जल्द मिलेंगे फ़िर से। और मिलकर सारी राखियां बांध कर आपसे ढेर सारे गिफ्ट्स लूंगी और बहुत सारी पार्टी भी। तब तक के लिये आप इसे पढ़कर मुस्करा दीजिये।

    बस आपकी छुटकी
    ~रानी