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  • rekhta 173w

    #गुमनाम

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    इश्क

    उस अजनबी से हाथ मिलाने के वास्ते






    महफ़िल में सब से हाथ मिलाना पड़ा मुझे

  • rekhta 173w

    #गुमनाम

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    अनजाना इश्क

    न तुमसे नजर मिली...नही दीदार हुआ...!!





    बस दिल से दिल मिला...और इश्क बेशुमार हुआ...!!

  • rekhta 173w

    #गुमनाम

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    फरामोशी

    किस लिए कतरा के जाता है मुसाफ़िर दम तो ले





    आज सूखा पेड़ हूँ कल तेरा साया मैं ही था

  • rekhta 173w

    #गुमनाम

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    फरामोशी

    किस लिए कतरा के जाता है मुसाफ़िर दम तो ले





    आज सूखा पेड़ हूँ कल तेरा साया मैं ही था

  • rekhta 173w

    #गुमनाम

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    हमसाया

    ये दिन अक्सर तुम्हारे साथ गुजरता है



    तुम साथ बेशक़ नही होते पर क़रीब रहते हो-!!

  • rekhta 173w

    #गुमनाम

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    मोहब्बत

    फिर उसके बाद मैं बचपन से निकल आया था...




    मोहब्बत मेरी आखिरी श़रारत थी..

  • rekhta 173w

    #गुमनाम

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    मोहब्बत

    उनकी गली तो जाइये मत ,तौबा कीजिये




    जो मिल गयी नज़र तो , कत्लेआम हो जाएगा !!

  • rekhta 173w

    मिजाज

    हमदर्दियां, जनाब मुझे काटती हैं अब....






    यूँ खामेखा मिज़ाज न पुछा करे कोई....



    गुमनाम

  • rekhta 173w

    बरसात

    चल तेरा भी इश्क में काम तमाम हुआ





    ओ सूरज तू भी बदली का गुलाम हुआ


    गुमनाम

  • rekhta 175w

    शायरी

    शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों को



    ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का


    - दाग़ देहलवी