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  • rhapsodist_akshay 2w

    ज़िन्दा रहकर क्या रोज़ थोडा थोडा मर पाओगी?
    सोचकर बताना क्या सच में हमसे मोहब्बत कर पाओगी?

    प्यार करोगी तो सब रीती रिवाज़ों को तोड़ना होगा
    यह बात सच हैं के घरवालों को भी छोड़ना होगा

    पास रहूँगा आखिर तक बस अब बिल्कुल भी नही रोना हैं
    क्या निभा पाओगी साथ? वहाँ ना पिताजी का प्यार ना माँ के हाथ खाना हैं

    इतना तो जान चुका हूं तुम्हें के जब आयेगी याद हर क़सम तोड़ दोगी
    बुलाएंगे तुम्हे तुम्हारे घरवालें तब बीच रास्ते मे साथ छोड़ दोगी

    लड़का हु इसलिए दुनिया के नज़र में हम ही गिर जाएंगे
    तुम्हारा क्या है तुम्हारे ज़िन्दगी में अछे दिन फिर आएंगे

    ©rhapsodist_akshay

  • rhapsodist_akshay 3w

    महँगाई

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    बहोत दिनसे बाहर नहीं गया सोचा कुछ समान ले आऊं
    उसी बहाने घूमने के साथ साथ कुछ खा - पी के आऊं...
    गर्मी से बेहाल स्टेशन आया तो पता नहीं शरबत वाले कहाँ खो गए
    मैंने की पूछताछ आजूबाजू तो समझा महँगे नींबू हो गए....

    वैसे भी आया ही था बाहर तो बोला कुछ खाया जाए
    जिस से ज़िंदगी में स्वादिष्ट तड़का वापस लाया जाए...
    मेनू कार्ड में सब्जी के दाम देखके वेटर से लड़ गया
    वो बोला क्या करूँ भाई तेल और गॅस दोनो बढ़ गया...

    चल पड़ा सोचके खाना पीना आज नसीब में लिखा ही नहीं
    पेट्रोल के दाम पता था इसलिए रिक्शा के तरफ़ देखा ही नहीं...
    घर आकर खुद के बनाएं दाल चावल खा कर मन तृप्त हो गया
    बिजली के दाम बढ़ने के कारण दोपहर में बिना फैन के सो गया...

    ©rhapsodist_akshay

  • rhapsodist_akshay 6w

    #ramnavmi रामनवमी

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    पूरे ब्रह्मांड मे बाजे जिनके पराक्रम का डंका...
    जिनके सिर्फ नाम से ही कापे पूरी लंका

    वनवास को भी आज्ञा बोले ना समझे सज़ा..
    गुणगान गाते नही रुक पाते देवता और प्रजा..
    सामर्थ्यशाली और निपुण योद्धा ऎसे रघुकुल के राजा

    पवन पुत्र के मुख मैं सदैव जिनका नाम हैं..
    उच्च नीच ना माने निपक्षपाती उनका काम हैं...
    ऎसे आदिपुरुष
    जगतगुरू
    रघुनंदन
    मर्यादा पुरुषोत्तम हमारे राजा राम हैं I

    ©rhapsodist_akshay

  • rhapsodist_akshay 7w

    स्कूलों/ कॉलेज में जिनको
    Friends Forever के pic में tag कीया था ...
    और जिनको फ्रेंडशिप डे पर
    सब से पहले फ्रेंडशिप बैंड दिया था ...

    Classroom के group pic के वक़्त
    कोई बोला था दोस्तों से जिंदगी रंग लाती हैं ....
    अब दोस्तों के update के नाम पर
    बस उनकी insta story seen होती हैं ....

    उनसे मिले अब पता नहीं कितने
    दिन महीने या फिर साल हो गए...
    Job शादी बच्चें और पैसा मिला
    बस साले मेरे पुराने यार खो गए...

    ©rhapsodist_akshay

  • rhapsodist_akshay 17w

    लिख देता हूँ आजकल हल्का फुल्का हि,

    दर्द अब कागज़ पर नही उरता........

    ©rhapsodist_akshay

  • rhapsodist_akshay 22w

    सोच की गहराइयों सें
    हर वक़्त लड़ता हूँ..
    जल्दी कैसे सोते हैं इसबारे में
    रोज़ रात रात भर पढ़ता हूँ ।

    अब तक की गलतियों का
    जुर्माना हर कदम भरता हूं...
    दुश्मनों से हँस के और
    दोस्तों से घुस्से से बात करता हूँ।

    छोड़ आया जिस मोड़ पे सबकुछ
    उसी मोड़ से रोज़ गुजरता हूं...
    टूटा भले हजारों दफ़ा में
    टूट टूटकर ही अब उभरता हूं।

    ©rhapsodist_akshay

  • rhapsodist_akshay 33w

    मिलते थे जिस जगह वहाँ अब तन्हाईयाँ का साया छाने लगा,

    छोड़ दिया उनके बारे में सोचना...

    जब से पता चला उनकी दुआओं में कोई और आने लगा ।

    ©rhapsodist_akshay

  • rhapsodist_akshay 37w

    दिन भर बातें करनेवाली चुप चुप रहने लगी..
    छोटी छोटी बातों पे अब आँसू बहानें लगी...
    बड़े बड़े ख़्वाबों पे उसके न कोई ताला था,
    बस सफ़ेदी की दुनियां में उसका रंग काला था ।

    खुद के इरादों को कुचलके लोग बोले वैसा करने लगी...
    शहरों में अकेली घूमनेवाली गांव के रास्तों से डरने लगी...
    कमी हैं खुद में इसी बद-मज़गी को उसने दामन में पाला था,
    गोरे को अच्छा कहनेवाले समाज में उसका रंग काला था |

    अच्छी ज़हांयत वाली को दुनिया ने कमजोर कर दिया..
    खुशियां की आस रखनेवाली की झोली दुखों से भर दिया..
    ज़िन्दगी में उसके तानों के साथ परोसा जाता निवाला था,
    देर से सही पता चला, कसूर के उसका रंग काला था ।

    ©rhapsodist_akshay

    ज़हांयत - character/ चारित्र
    बद-मज़गी-misunderstanding/ गलतफहमी

  • rhapsodist_akshay 38w

    छल कपट को छोड़ के निपक्ष का पर्दा धर लेंगे..
    आज जितलो दुतः तुम, हम अज्ञातवास कर लेंगे..

    ना बात,ना वचन,ना अब कवच कुण्डलों का दान होगा..
    ना तो अब इस रणभूमि में धर्म अधर्म का ज्ञान होगा..

    खुद के बेटे को गंगा में छोड़ना ये कहाँ का सूत्र हैं..
    मुझे सुत कहके नीचा दिखाना, क्या यही तुम्हारा गौत्र हैं?..

    ना अंगराज, ना परशुराम शिष्य, ना ही दुर्योधन का मित्र हैं..
    रणभूमी में धनुष्य लिए खड़ा सिर्फ राधे मां का पुत्र हैं..

    फर्क नही पड़ता अब शिव हो या माधव हो तुम्हारे पिछे..
    बिना किसी सहारे पांडवों का सिर गिरा दूंगा आज मैं निचे..

    ना तो किसी का घर, ना कोई सेना आज निस्तानभुत होगी..
    सिर्फ धनुर्विद्या के कौशल से महती आज साबित होगी..

    आज के बाद ना किसी काम के लिए ना कोई वर्ण होगा..
    महाभारत के हर इक पन्नों मैं बस कर्ण ही कर्ण होगा..

    ©rhapsodist_akshay

  • rhapsodist_akshay 40w

    चल आया ज़्यादा ही दूर अब मुक़ाम पे खड़ा हूँ..
    लोगों से ज्यादा अपने आप से अबतक लड़ा हूँ..
    हालात देखने के लिए थोड़ा भी पीछे नहीं मुड़ता,
    कोई हो साथ या ना हो अब तो फर्क नहीं पड़ता ।

    मायने नहीं रखता अब कौन गलत कौन सही हैं..
    मुझे नीचा दिखानेवाले अभी भी जहाँ थे वहीं हैं..
    पता चला बुरे वक़्त के सफ़र में कोई नहीं जुड़ता,
    कोई हो साथ या ना हो अब तो फर्क नहीं पड़ता ।

    लोगों के लिए नहीं ख़ुद के लिए कुछ हासिल करना है..
    पल पल के पापों का हिसाब ऊपर नहीं यहीं भरना हैं..
    देख लेंगें अब जो भी हो खामखाँ किसी से नहीं भिड़ता,
    बहोत कुछ सीखा अब किसी चीज़ से फर्क नहीं पड़ता ।

    ©rhapsodist_akshay