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  • rising_sun_authority 57w

    #हवाएँ #ख़याल #घर #याद #कछबात #ज़िंदगी #सफ़र

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    हवाएँ

    सर्द हवाओं के इंतेज़ार में रहता था जब घर पे था, अब इस अनजान देश की गर्म हवायें घर की याद दिलाती हे |

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  • rising_sun_authority 57w

    Human

    Bonded labourer of his own desires

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  • rising_sun_authority 57w

    बंधुआ मज़दूर

    इंसान
    अपनी ख्वाहिशों का बंधुआ मज़दूर

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  • rising_sun_authority 65w

    इंसान
    किसी एक का होके कैसे रह सकता हे ताउम्र?
    हज़ारों ख्वाहिशें अंगड़ाई लेती हे हर्रोज,
    निभाना भी चाहे वफ़ा,
    तो किससे निभाए??
    अपनी ख्वाहिशों से या उस इंसान से??
    और निभा भी ले उस एक इंसान से,
    तो ज़िंदगी का क्या, ख्वाहिशों का क्या???


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  • rising_sun_authority 65w

    જીવન દ્વંદમા જાય છે,
    વફા, તારી સાથે નીભાવુ કે મારી સાથે?

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  • rising_sun_authority 65w

    Non-monogamy

    I can be honest,
    But I can’t be ‘yours only.’


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  • rising_sun_authority 139w

    अगर फिर कहीं मिलना हुआ

    अगर फिर से कभी मिलना हुआ,
    तो देखना मत मेरी और,
    चाहे हज़ार दफ़ा मूड के देखूँ तुजे,
    सुनना मत मेरी आवाज़,
    चाहे हज़ार दफ़ा पुकारूँ तुजे,
    अजनबी को अजनबी ही बने रहने देना,
    कभी क़रीब मत आने देना, मत आने देना, मत आने देना।

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  • rising_sun_authority 150w

    घर

    पता नहीं किसकी तलाश में सब छोड़ के निकल पड़ते हे,
    घर से ख़ूबसूरत कोई और छत या दीवार होती हे भला!
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  • rising_sun_authority 153w

    दुनिया को उसकी बेवफ़ाई बताने निकला
    तो हाथो में कलम पकड़ादी इस दिल ने,
    और क़िस्से सारे किताबों में रह गए ।
    मैं उसे ढंग से बदनाम भी नहीं कर सका
    जो, मूँजे ज़िंदगी भर के लिए बर्बाद कर के चले गए ।।

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  • rising_sun_authority 153w

    अजीब हे दिल की आदत भी
    कोई और पूछे के “कैसे हो?”
    फट से बोल देता हे, “ख़ूब मज़ेमे, आप सुनाओ।”
    और अगर “वो” पूछ ले कहीं से कभी,
    तो आँखो से अश्क़ बनके बहने लगता हे।।

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