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  • riyalingwal 37w

    Poem

    आज के प्यार ने,
    इश़क तो देखा ही नहीं।

    मोबाइल की चैट से हट कर,
    कभी खत लिखकर देखा ही नहीं।

    सुनहरे नजरों के साथ,
    कभी नरम धूप साथ में सेंकी ही नहीं।

    इज़हार-ए- मोहब्बत की जल्द में,
    खो न जाने के डर से झुपकर कभी देखा ही नहीं।
    ©riyalingwal

  • riyalingwal 64w

    क्यों इस लम्हे में,
    है इतना सुकून।
    क्यों है मुझमे अब,
    इतना सा जुनून।
    हुकुम सी है अब,
    तालीम तेरी!
    क्यों लफ़्ज़ों की जगह,
    अब उगले है खून।
    है तकलीफ भी,
    ये कमाल की।
    कि तू शक्ल ही नहीं
    अब सवाल भी है।
    तू खुद को दोष
    देता है क्यों?
    गलती तेरी थी या मेरी
    अब ये कोई सवाल ही नहीं!
    खामोश सी रहें और,
    ख्वाहिश सी ये जिंदगी है!
    अब मैं तेरी या तू मेरा,
    ऐसा कोई बवाल नहीं है!
    ©riyalingwal