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Reposts
  • saknim24 1w

    ज़ख़्म देकर हमें फिर हमारा हाल पूछते हैं
    दर्द में धकेल कर फिर संभल जाने को कहते हैं
    इश्क न हुआ कोई जंग लड़ रहे हो जैसे
    ‌हराकर हमें फिर हमारे जीतने की दुआ करते हैं...
    ©saknim24

  • saknim24 2w

    चलो तुम्हारा ज़िक्र भी कर ही देते हैं
    हाॅ॑! तुम बिन मेरी सुबह नहीं होती
    जो तुम न मिलो तो इक‌ बेचैनी सी है होती‍♀️
    आदत कहो, तलब कहो या कह दो नशा ‍♀️
    पर सच में तुम बिन दिमाग की बत्ती नहीं जलती
    मीठी सी, ज़रा सी कड़क, अदरक वाली तुम ☕
    इश्क हो, ज़रूरत हो, सच्ची हमदर्द हो तुम ❤️
    ©saknim24

  • saknim24 2w

    Clerihew

    A Clerihew is a comic verse consisting of two couplets and a specific rhyming scheme, aabb invented by Edmund Clerihew Bentley (1875-1956) at the age of 16. The poem is about/deals with a person/character within the first rhyme. In most cases, the first line names a person, and the second line ends with something that rhymes with the name of the person.


    [Suppandi is a comic character who appears in Tinkle comics. Suppandi, is typically a village simpleton.]

    PS-- Suppandi, my favourite character from my favourite comic TINKLE. Brings childhood memories back...
    ( I doubt Suppandi could read though!��.I imagined an advanced version of Suppandi)

    PC - Wikipedia

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    Tinkle's simpleton Suppandi
    Wouldn't give his master the bought candy
    He wanted to wait as he wasn't a dunce
    The wrapper read "Best before six months"!!!!
    ©saknim24

  • saknim24 2w

    रास्तों में कुछ कशिश ऐसी है
    कि हम मंज़िल भुला बैठे हैं
    सफ़र छोटा नहीं ये मानते हैं मगर
    हम हर मक़ाम को खो बैठे हैं

    जिंदगी भी इतने मोड़ ले आती है
    कि हम ठहरना भुला बैठे हैं
    पता नहीं मिलता अक्सर खुशियों का मगर
    हम ग़म को मुस्कुराहट में बंद कर बैठे हैं

    कई बार नया दिन ऐसे इम्तिहान लेकर आता है
    कि हम हारना - जीतना भुला बैठे हैं
    हर लम्हा यादों का हिस्सा बनता जा रहा है मगर
    हम ख़ुद से आज को जीने का वादा कर बैठे हैं....
    © saknim24

  • saknim24 4w

    जब लोग हाल पूछते थे, तुम्हारे जाने के बाद
    हम बहुत रोते थे, थोड़ा मुस्कुराने के बाद...
    ©saknim24

  • saknim24 6w

    हमें तो दर्द छिपाने‌ की आदत सी है
    फिर जाने कैसे ये तन्हाई अश्कों को ढूंढ ही लेती है...
    © saknim24

  • saknim24 7w

    उनका अंदाज़ ही इतना ज़ालिम है
    कि‌ हम घायल भी होते हैं तो उनकी एक मुस्कान से...
    © saknim24

  • saknim24 7w

    Lonely untold musings
    To die never yearn they
    Aborning as poems...
    © saknim24

  • saknim24 8w

    Crammed with some precious and some worthless gems,
    The decrepit casket lies still
    A cavernous corner readily rooming with it.
    Mostly deserted it lay,
    Yet explored often by my lonesome heart,
    Harrowing the barren space,
    Steaming off the bulky ones,
    Clinging onto the fond chunks
    Overlooking the wounded pieces
    Coddling the desired ones,
    And as my heart finishes the tasks,
    The caddy dampened with emotional showers
    Is abandoned again,
    For my inner strength surfaces
    Making me feathery,
    More stronger,
    Living again, smiling again,
    Until..I'm invaded again,
    by the same decrepit casket,
    Crammed with some precious and some worthless gems, those sweet and bitter memories...
    © saknim24

  • saknim24 8w

    तुम नहीं तो यहां फज़ा भी ख़ामोश है
    इस जहां से जुड़ा मज़ा भी ख़ामोश है

    दिल न माने इसे मनाना बेकार है
    धड़कनों में दबी अज़ा भी ख़ामोश है

    हम चुरा ले गए ख़ज़ाना जज़्बात का
    फिर न जाने कि क्यों सज़ा भी ख़ामोश है

    हर दफा बस तुमहें दुआओं में मांगना
    इस वफ़ा के लिए रज़ा भी ख़ामोश है

    तुम नहीं जिंदगी बुलाती है फिर भी
    जी रहे रोज़ तो कज़ा भी ख़ामोश है....
    © saknim24